देश की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। कथित तौर पर विश्वविद्यालय परिसर में लगे ‘कब्र खुदेगी’ जैसे नारे के बाद राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी का कहना है कि जेएनयू छात्रसंघ से जुड़े लेफ्ट समर्थक छात्रों ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ नारेबाज़ी की है।
इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगे हैं कि जेएनयू में बार-बार विवादित नारे क्यों लगते हैं और हर बार हंगामा बढ़ने के बाद ही विश्वविद्यालय प्रशासन की सक्रियता क्यों नजर आती है। आरोप है कि विवाद सामने आने के बाद ही जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होती है।
विवाद के केंद्र में इस बार भी साबरमती हॉस्टल बताया जा रहा है। इससे पहले भी इसी हॉस्टल का नाम कई राजनीतिक और वैचारिक टकरावों में सामने आता रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे राष्ट्र विरोधी मानसिकता से जोड़कर देख रहा है।
फिलहाल जेएनयू प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं। अब देखना होगा कि इस ताजा विवाद के बाद जेएनयू में स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है या फिर यह मामला भी पिछले विवादों की तरह राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रह जाता है।
