January 26, 2026
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” बना जनसेवा का सशक्त माध्यम, 3.22 लाख से अधिक नागरिकों को मिला सीधा लाभ
राज्य

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” बना जनसेवा का सशक्त माध्यम, 3.22 लाख से अधिक नागरिकों को मिला सीधा लाभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित जनसेवा का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के सभी 13 जनपदों में निरंतर जनसेवा शिविरों का आयोजन कर आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान उनके द्वार पर सुनिश्चित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के अंतर्गत 19 जनवरी 2026 तक प्रदेशभर में कुल 395 शिविरों का आयोजन किया गया, जिनमें 3 लाख 22 हजार 585 से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की। इन शिविरों के माध्यम से 32 हजार 746 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 22 हजार 173 मामलों का त्वरित निस्तारण किया जा चुका है। यह आंकड़े राज्य सरकार की संवेदनशीलता और प्रशासनिक तत्परता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

शिविरों के दौरान विभिन्न प्रमाण पत्रों एवं अन्य शासकीय सेवाओं के लिए 43 हजार 418 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से 1 लाख 75 हजार 258 नागरिकों को सीधे लाभान्वित किया गया। यह उपलब्धि मुख्यमंत्री की उस सोच को साकार करती है, जिसमें शासन को जनता के निकट लाकर अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्राथमिक उद्देश्य है।

जनपदवार आंकड़ों की बात करें तो देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, अल्मोड़ा, नैनीताल और पिथौरागढ़ जैसे जनपदों में व्यापक जनभागीदारी देखने को मिली। अकेले देहरादून में 41,889, हरिद्वार में 64,686, उधम सिंह नगर में 24,421 और अल्मोड़ा में 24,771 नागरिकों ने इस पहल से लाभ प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास का मजबूत सेतु है। जब सरकार स्वयं जनता के द्वार तक पहुंचती है, तो समस्याओं का समाधान ही नहीं होता, बल्कि शासन के प्रति जनविश्वास भी सुदृढ़ होता है।

यह अभियान उत्तराखंड में सुशासन की एक नई कार्यसंस्कृति को स्थापित कर रहा है, जिसमें संवाद, समाधान और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह कार्यक्रम आगे भी निरंतर जारी रहेगा और उत्तराखंड को जनकल्याण के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

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