कोटद्वार।
उत्तराखंड के कोटद्वार में दुकान के नाम को लेकर हुए विवाद के बाद माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। बुजुर्ग दुकानदार के समर्थन में सामने आए जिम संचालक दीपक कुमार ने अब इस पूरे घटनाक्रम पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि घटना के बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं, जिससे उन्हें अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सताने लगी है।
दीपक कुमार ने हमारे सहयोगी आज तक से बातचीत में कहा कि वह खुद से ज्यादा अपनी मां, पत्नी और पांच साल की बेटी की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं।
क्या है पूरा विवाद
कोटद्वार में एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार पिछले कई वर्षों से ‘बाबा’ नाम से जुड़ी दुकान चला रहे हैं। हाल ही में कुछ लोगों ने दुकान के नाम को लेकर आपत्ति जताई और नाम बदलने का दबाव बनाया। आरोप है कि इस दौरान दुकानदार के साथ बदतमीजी और अपमानजनक व्यवहार किया गया।
इसी दौरान स्थानीय जिम संचालक दीपक कुमार ने बुजुर्ग दुकानदार के समर्थन में हस्तक्षेप किया और मामले को शांत कराने की कोशिश की।
दीपक बोले – बदतमीजी देखकर चुप नहीं रह सका
दीपक कुमार ने बताया कि घटना वाले दिन कुछ लोग बुजुर्ग दुकानदार के साथ गाली-गलौज कर रहे थे।
उन्होंने कहा,
“एक जागरूक नागरिक होने के नाते मुझसे यह देखा नहीं गया। मैंने सिर्फ बीच-बचाव किया और पीड़ित के साथ खड़ा हुआ।”
‘मोहम्मद दीपक’ कहने पर दी सफाई
घटना के बाद सोशल मीडिया पर दीपक का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताते नजर आए। इस पर सफाई देते हुए दीपक ने कहा कि उस समय माहौल बेहद खराब था और प्रदर्शनकारी एक खास समुदाय को निशाना बना रहे थे।
उन्होंने कहा,
“मेरा मकसद किसी को चिढ़ाना नहीं था। मैं सिर्फ यह संदेश देना चाहता था कि भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी साथ रहते हैं। मैं हिंदू हूं और मेरा असली नाम दीपक कुमार है।”
परिवार की सुरक्षा को लेकर डर
दीपक कुमार ने बताया कि घटना के बाद देहरादून और आसपास के इलाकों से आए कुछ युवकों ने उनके घर और दुकान के आसपास आकर गाली-गलौज की, जिससे उनका परिवार डर गया है।
उन्होंने कहा,
“मैं खुद के लिए इतना नहीं डरता, लेकिन मेरी छोटी बच्ची और परिवार की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंता है। लगातार धमकियां मिल रही हैं।”
शांति और भाईचारे की अपील
दीपक कुमार ने अंत में कोटद्वार की जनता से शांति बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने कहा कि कोटद्वार एक छोटा और शांत शहर है, जिसे नफरत की आग में नहीं झोंकना चाहिए।
दीपक ने कहा,
“हर किसी को अपने धर्म को मानने का अधिकार है। सबसे पहले इंसानियत जरूरी है। हमें मिल-जुलकर रहना चाहिए ताकि शहर में फिर से भाईचारा लौट सके।”
