January 26, 2026
कुंभ 2027 की तैयारियां तेज — पहली बार कुंभ क्षेत्र में दौड़ेंगी परिवहन निगम की इलेक्ट्रिक बसें
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कुंभ 2027 की तैयारियां तेज — पहली बार कुंभ क्षेत्र में दौड़ेंगी परिवहन निगम की इलेक्ट्रिक बसें

देहरादून। वर्ष 2027 में हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेला की तैयारियों को लेकर उत्तराखंड सरकार के सभी संबंधित विभाग जुट गए हैं। कुंभ मेले के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना को देखते हुए उत्तराखंड परिवहन निगम ने भी परिवहन सुविधाओं को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की है।

इस बार कुंभ मेले में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। पहली बार कुंभ मेला परिसर के भीतर भी परिवहन निगम की बसें श्रद्धालुओं को लाती-ले जाती नजर आएंगी। परिवहन निगम ने कुंभ निधि से 700 नई बसें उपलब्ध कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।

अब तक कुंभ मेले के दौरान परिवहन निगम मुख्य रूप से कुंभ परिसर के बाहर से ही बसों का संचालन करता रहा है, ताकि अन्य राज्यों से आने वाले यात्रियों को हरिद्वार पहुंचने में कोई परेशानी न हो। लेकिन कुंभ 2027 को देखते हुए निगम ने कुंभ क्षेत्र के भीतर इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का निर्णय लिया है। योजना के तहत करीब 150 इलेक्ट्रिक बसें कुंभ मेला क्षेत्र में तैनात की जाएंगी

दरअसल, प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत देहरादून और हरिद्वार में 150 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का प्रस्ताव है। इसके लिए दोनों शहरों में चार्जिंग स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है, जो अगले छह महीनों में पूरा होने की संभावना है। इसके बाद अनुबंध के आधार पर इन बसों का संचालन शुरू होगा। कुंभ मेले के दौरान इन्हीं बसों को मेला परिसर में चलाने की रणनीति तैयार की गई है।

उत्तराखंड परिवहन निगम की प्रबंध निदेशक रीना जोशी ने बताया कि पिछले कुंभ मेले में भी परिवहन निगम ने बड़ी संख्या में बसों का संचालन किया था। आगामी कुंभ मेले में भी यात्रियों की सुविधा को देखते हुए बड़े पैमाने पर बस सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में निगम की करीब 400 बसों की स्थिति जर्जर है। इसे देखते हुए कुंभ निधि से 700 नई बसें खरीदने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इसके लिए स्वीकृति मिलेगी।

रीना जोशी ने बताया कि कुंभ 2027 के लिए यह एक नई पहल होगी, जहां श्रद्धालुओं को कुंभ मेला परिसर के भीतर भी सीधे परिवहन निगम की बस सुविधा मिलेगी। फिलहाल 150 बसों को चलाने का निर्णय लिया गया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर बसों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है।

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