7 मई 2025 को जब भारत ने सीमाओं पर ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की, उसी समय नई दिल्ली ने वॉशिंगटन में एक शांत लेकिन बेहद सटीक कूटनीतिक अभियान भी लॉन्च कर दिया। यह रणनीति केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें ट्रेड, राजनीति और अमेरिकी मीडिया के साथ संवाद को भी एक साथ साधने की व्यापक योजना शामिल थी।
सूत्रों के अनुसार, यह डिप्लोमेसी चरणबद्ध और सोच-समझकर आगे बढ़ाई गई। भारत का फोकस साफ था—सीमा पर आतंकवाद के खिलाफ कठोर संदेश और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहयोग व स्थिरता की छवि को मजबूत करना। इस दौरान वॉशिंगटन में नीति-निर्माताओं, थिंक टैंक्स और प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ संवाद को प्राथमिकता दी गई।
खास बात यह रही कि यह संपर्क डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की सरकार के साथ किया गया। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद पर भारत का रुख अडिग है, वहीं ट्रेड और निवेश के मोर्चे पर साझेदारी को आगे बढ़ाने की गुंजाइश भी खुली है।
कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि वॉशिंगटन में यह साइलेंट डिप्लोमेसी नई दिल्ली की ‘डबल स्ट्रैटजी’ का अहम हिस्सा थी—जहां एक ओर सीमा पर ऑपरेशनल एक्शन, तो दूसरी ओर वैश्विक साझेदारों को भरोसे में लेने की कोशिश की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने इस दौरान अमेरिकी मीडिया में नैरेटिव मैनेजमेंट पर भी ध्यान दिया, ताकि ऑपरेशन को क्षेत्रीय स्थिरता और आत्मरक्षा के संदर्भ में समझाया जा सके। ट्रेड वार्ताओं में भी यह संकेत दिया गया कि सुरक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी साथ-साथ चल सकती है।
निष्कर्ष:
बॉर्डर पर ऑपरेशन सिंदूर और अमेरिका में साइलेंट डिप्लोमेसी—भारत की यह डबल स्ट्रैटजी दिखाती है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में नई दिल्ली सैन्य और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर एक साथ खेलने की तैयारी में है।
