डिजिटल दौर में भी प्रासंगिक है रेडियो, भारत में 1500 से अधिक स्टेशन — ट्रैफिक श्रोता बन सकते हैं भविष्य
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डिजिटल दौर में भी प्रासंगिक है रेडियो, भारत में 1500 से अधिक स्टेशन — ट्रैफिक श्रोता बन सकते हैं भविष्य

विशेष रिपोर्ट

डिजिटल और इंटरनेट क्रांति के बावजूद रेडियो आज भी संचार, संवाद और मनोरंजन का एक सशक्त माध्यम बना हुआ है। कभी ट्रांजिस्टर के जरिए खेत-खलिहानों, पहाड़ों और नदियों तक पहुंचने वाला रेडियो अब स्मार्ट स्पीकर, मोबाइल ऐप और इंटरनेट स्ट्रीमिंग के जरिए आधुनिक रूप में मौजूद है। विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर भारतीय परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता पर गंभीर विचार की आवश्यकता है।

इंटरनेट और रील्स के बढ़ते आकर्षण ने पारंपरिक रेडियो के सामने चुनौती जरूर पेश की है, लेकिन संकट के समय इसकी उपयोगिता आज भी सर्वोपरि है। प्राकृतिक आपदा या नेटवर्क ठप होने की स्थिति में रेडियो ही एकमात्र विश्वसनीय संचार माध्यम साबित होता है।

भारत में लगभग 1500 रेडियो स्टेशन संचालित हो रहे हैं, जिनमें आकाशवाणी (All India Radio), निजी एफएम और सामुदायिक रेडियो शामिल हैं।

जुलाई 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:

  1. आकाशवाणी के 585 एफएम स्टेशन

  2. 591 सामान्य स्टेशन

  3. करीब 755 ट्रांसमीटर

  4. 231 स्टेशनों पर कार्यक्रम निर्माण

  5. देश की 99.2% आबादी तक पहुंच

इसके अलावा 112 शहरों में 388 निजी एफएम स्टेशन सक्रिय हैं, जबकि 500 सामुदायिक रेडियो स्टेशन किसानों, जनजातीय और ग्रामीण समुदायों के लिए प्रसारण कर रहे हैं।

अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में रेडियो ड्राइविंग के दौरान सबसे लोकप्रिय माध्यम है। भारत में भी इसकी अपार संभावनाएं हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 7 करोड़ कारें पंजीकृत हैं और लगभग 2 करोड़ कारें प्रतिदिन सड़कों पर चलती हैं।

कार रेडियो, ट्रैफिक अपडेट, मौसम, स्थानीय समाचार और क्षेत्रीय भाषा के कार्यक्रम रेडियो को दोबारा लोकप्रिय बना सकते हैं। ट्रक और बस ड्राइवरों के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार कर रेडियो अपने श्रोता वर्ग को और मजबूत कर सकता है।

रेडियो की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्थानीय विषय-वस्तु है। स्थानीय खबरें, मौसम अपडेट और क्षेत्रीय भाषा के कार्यक्रमों में उसकी पकड़ अब भी मजबूत है। सस्ता इंटरनेट पैक और डिजिटल स्ट्रीमिंग रेडियो को वैश्विक पहुंच देने में मददगार साबित हो सकते हैं।

रेडियो अगर आधुनिक तकनीक और लक्षित कंटेंट के साथ खुद को ढाले, तो वह न सिर्फ जिंदा रहेगा बल्कि डिजिटल युग में भी प्रभावी और प्रासंगिक माध्यम बना रहेगा।

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