देहरादून। आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर जमीयत उलेमा जिला देहरादून ने मुस्लिम समाज से कानून, शरई हिदायतों और सामाजिक सौहार्द का पालन करते हुए कुर्बानी करने की अपील की है। संगठन ने साफ कहा कि धार्मिक कार्यों को जिम्मेदारी, संयम और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न किया जाना चाहिए।
गुरुवार को आज़ाद कॉलोनी स्थित मदरसा दार-ए-अरकम में आयोजित बैठक के बाद जमीयत उलेमा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कुर्बानी इस्लाम का एक अहम इबादती अमल है, जिसका उद्देश्य केवल अल्लाह की रज़ा हासिल करना है, न कि दिखावा या प्रदर्शन करना।

संगठन ने कहा कि वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि ऐसा कोई कार्य न किया जाए जिससे विवाद या तनाव की स्थिति उत्पन्न हो। जमीयत उलेमा ने मुस्लिम समाज से अपील की कि कुर्बानी केवल निर्धारित और वैध स्थानों पर ही की जाए। सड़क, गली, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी करने से बचने की सलाह दी गई है।
संगठन ने प्रशासन और पुलिस द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करने की अपील भी की। साथ ही लोगों से कुर्बानी के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न करने को कहा गया। जमीयत उलेमा ने कहा कि इस तरह की सामग्री कई बार अनावश्यक विवाद और गलतफहमियां पैदा कर सकती है।
बैठक में साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर भी विशेष जोर दिया गया। संगठन ने कहा कि कुर्बानी के बाद खून, अवशेष और गंदगी को तुरंत साफ किया जाए। सार्वजनिक स्थानों, नालियों और सड़कों पर गंदगी फैलाना न केवल कानूनन गलत है बल्कि इस्लाम की शिक्षाओं के भी खिलाफ है। संस्था ने कहा कि स्वच्छता और पड़ोसियों की सुविधा का ध्यान रखना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
जमीयत उलेमा ने लोगों से अफवाहों, भड़काऊ बातों और उकसावे से दूर रहने की अपील की। किसी भी विवाद की स्थिति में तत्काल प्रशासन और पुलिस को सूचना देने की बात कही गई। मस्जिदों के इमामों और खतीबों से भी नमाज के दौरान अमन, भाईचारे और जिम्मेदार सामाजिक व्यवहार का संदेश देने का आग्रह किया गया।
संगठन ने उत्तराखंड से गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिलाने के लिए प्रदेशव्यापी मुहिम चलाने का भी ऐलान किया।

बैठक में जमीयत उलेमा जिला देहरादून के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल सलाम कासमी, शहर अध्यक्ष मुफ्ती अयाज़, जनरल सेक्रेटरी हाफिज आबिद, मुफ्ती वासिल क़ासमी, मुफ्ती हुजैफा क़ासमी, मुफ्ती राशिद, मौलाना गुलशेर, मौलाना मुतायब, मुफ्ती अरशद, मुफ्ती खुशनुद, मुफ्ती बुरहान रब्बानी, मौलाना एजाज़ क़ासमी, मास्टर अब्दुल सत्तार, मौलाना महताब, कारी अबुल फ़ज़ल, मौलाना सलमान नदवी, मौलाना अब्दुल वाजिद, कारी फरहान, मोहम्मद शाह नज़र और मुफ्ती नसीम सहित कई लोग मौजूद रहे।
