देहरादून में संदिग्ध संस्थान पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग का छापा, दस्तावेज पुलिस को सौंपे
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देहरादून में संदिग्ध संस्थान पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग का छापा, दस्तावेज पुलिस को सौंपे

देहरादून, 02 जून 2026। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना के निर्देश पर आयोग की टीम ने जनपद देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र स्थित खैरी गांव में संचालित एक संदिग्ध संस्थान पर छापेमार निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान “मेडिकल एम्बेसडर” नाम से संचालित संस्थान में विभिन्न दस्तावेज, रजिस्टर, प्रचार सामग्री, पोस्टर एवं अन्य अभिलेख प्राप्त हुए।

आयोग के अनुसार, प्रथम दृष्टया संस्थान द्वारा बच्चों की शिक्षा, सामाजिक सेवा एवं सहायता के नाम पर गतिविधियां संचालित किए जाने का दावा किया जा रहा था। हालांकि निरीक्षण के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों एवं अभिलेखों के अध्ययन से यह प्रतीत हुआ कि संस्थान की गतिविधियां केवल शैक्षणिक कार्यों तक सीमित नहीं थीं।

आयोग की टीम को परिसर में विभिन्न प्रकार की प्रचार सामग्री, साहित्य एवं दस्तावेज प्राप्त हुए, जिनके आधार पर कुछ गतिविधियों की विस्तृत जांच की आवश्यकता महसूस की गई। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि संस्थान में नियमित एवं व्यवस्थित शैक्षणिक गतिविधियों का स्पष्ट स्वरूप दिखाई नहीं दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार संस्थान में मणिपुर निवासी एक चालक कार्यरत पाया गया, जबकि पौड़ी जनपद से संबंधित एक परिवार कई वर्षों से परिसर में निवासरत एवं संस्थान की गतिविधियों से जुड़ा हुआ मिला। आयोग को प्राप्त प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर कुछ आर्थिक सहायता एवं सामाजिक सहयोग से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं, जिनकी जांच आवश्यक बताई गई है।

निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसे अभिलेख भी प्राप्त हुए जिनसे संस्थान की गतिविधियों का संबंध कैनाल रोड स्थित एक अस्पताल से होने की संभावना व्यक्त की गई है। इसके अतिरिक्त कुछ दस्तावेजों में बाहरी स्रोतों से आर्थिक सहयोग प्राप्त होने के संकेत भी मिले हैं, जिनकी सत्यता की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जाएगी।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बच्चों की शिक्षा, संरक्षण एवं कल्याण के नाम पर संचालित किसी भी संस्था द्वारा यदि बच्चों अथवा उनके परिवारों के अधिकारों को प्रभावित करने वाली गतिविधियां की जाती हैं तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर अवसर प्रदान करना सभी संस्थाओं की जिम्मेदारी है।

डॉ. खन्ना ने बताया कि निरीक्षण के दौरान प्राप्त दस्तावेजों, अभिलेखों एवं अन्य सामग्रियों को अग्रिम जांच एवं आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अवैध गतिविधि अथवा बच्चों के अधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सचिव एस.के. बर्नवाल भी मौजूद रहे और उन्होंने संपूर्ण कार्रवाई का पर्यवेक्षण किया।

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