दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। मामले में होटल मालिक लवकेश बजाज की गिरफ्तारी के बाद अब 65 वर्षीय शेफ केशव नेगी को भी गिरफ्तार किया गया है।
लेकिन केशव नेगी की गिरफ्तारी के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
केशव नेगी कोई होटल मालिक नहीं थे, न ही भवन निर्माण, लाइसेंस, फायर सेफ्टी या प्रशासनिक अनुमति से उनका कोई संबंध था। वे एक कर्मचारी के रूप में रसोई में कार्यरत थे और अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मेहनत कर रहे थे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी भवन में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हुआ, फायर सेफ्टी के नियमों की अनदेखी हुई या रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की गईं, तो उनकी जिम्मेदारी किसकी है?
क्या उन अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी जिन्होंने समय-समय पर निरीक्षण किए होंगे?
क्या उन विभागों से जवाब मांगा जाएगा जिन्होंने संचालन की अनुमति दी?
क्या यह पता लगाया जाएगा कि भवन सभी सुरक्षा मानकों का पालन कर रहा था या नहीं?
स्थानीय लोगों और उत्तराखंड के कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर देने से न्याय नहीं होगा।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से हजारों युवा रोज़गार की तलाश में महानगरों का रुख करते हैं। वे अपने परिवारों के सपनों को पूरा करने के लिए कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित हो।
मालवीय नगर अग्निकांड में जान गंवाने वालों को न्याय मिलना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि वास्तविक जिम्मेदार लोगों की पहचान हो और जवाबदेही तय हो। यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही, नियमों की अनदेखी या भ्रष्टाचार हुआ है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
न्याय का अर्थ केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि सच्चाई तक पहुंचना और हर जिम्मेदार व्यक्ति को कानून के दायरे में लाना है।
