देहरादून, 8 जून। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले सोमवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने देहरादून स्थित CBI कार्यालय का घेराव कर अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच में हुई प्रगति को सार्वजनिक करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने CBI को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि जांच की वर्तमान स्थिति और महत्वपूर्ण सवालों पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। प्रारंभ में CBI अधिकारियों द्वारा कार्यालय का मुख्य गेट बंद कर दिया गया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बाद में चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को CBI कार्यालय के भीतर बुलाया गया।
प्रतिनिधिमंडल में कमला पंत, निर्मला बिष्ट, सुजाता पाल और मोहित डिमरी शामिल थे। उन्होंने CBI के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए जांच में हो रही देरी और पारदर्शिता के अभाव पर चिंता जताई।
ज्ञापन में मंच ने सवाल उठाया कि छह माह से चल रही जांच में अब तक क्या प्रगति हुई है, क्या मामले से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों से पूछताछ की गई है, क्या पीड़ित परिवार द्वारा उठाए गए सवालों को जांच का हिस्सा बनाया गया है तथा साक्ष्य मिटाने या जांच को प्रभावित करने के आरोपों की जांच किस स्तर पर पहुंची है।
CBI अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं और चिंताओं को दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय के सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
मंच की ओर से कहा गया कि अंकिता भंडारी प्रकरण केवल एक परिवार का मामला नहीं बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, न्याय और जनता के विश्वास से जुड़ा विषय है। मंच ने चेतावनी दी कि यदि सात दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो व्यापक जनभागीदारी के साथ आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी तथा CBI कार्यालय की तालाबंदी अभियान शुरू किया जाएगा।
प्रदर्शन में पदमा गुप्ता, मंजू बलोदी, स्मृति नेगी, सुशीला अमोली, पुष्पा नौडियाल, गीता बागड़ी, ज्योति नेगी, मीणा राणा, यशोदा, शांति सेमवाल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भाग लिया।
