देहरादून। देहरादून की जीवनरेखा मानी जाने वाली रिस्पना नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण और सौंदर्यीकरण की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर परियोजना को मिशन मोड में संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन केवल एक सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़ा व्यापक अभियान है।

बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से एक विशेष टास्कफोर्स गठित की जाए। यह टास्कफोर्स नदी क्षेत्र में अतिक्रमण, प्रदूषण, जल प्रवाह, नालों की स्थिति और सौंदर्यीकरण से जुड़े सभी कार्यों की नियमित निगरानी करेगी।
जिलाधिकारी ने नगर निगम देहरादून को सात दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना (एक्शन प्लान) तैयार करने के निर्देश दिए। इस योजना में ड्रोन सर्वे के माध्यम से पूरी नदी का मानचित्रण, नदी में गिरने वाले नालों की पहचान, गार्बेज प्वाइंट्स का चिन्हीकरण और प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का विवरण शामिल होगा। इसके आधार पर चरणबद्ध तरीके से सुधारात्मक कार्य किए जाएंगे।
बैठक में सिंचाई विभाग, वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों को भी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ तय समय सीमा में कार्यों को पूरा करें, ताकि परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि किसी भी नदी का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नदी को स्वच्छ रखने और पर्यावरण संरक्षण के इस अभियान में सहयोग करें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन का उद्देश्य केवल नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना ही नहीं, बल्कि उसके प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करते हुए उसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना भी है। जिला प्रशासन इस दिशा में सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर समयबद्ध तरीके से कार्यों को आगे बढ़ाएगा।
बाइट: डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी, देहरादून।
