वोकल फॉर लोकल: हल्द्वानी की महिलाओं ने तैयार की हस्तनिर्मित रेशमी राखियां, रक्षाबंधन पर बढ़ी मांग
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वोकल फॉर लोकल: हल्द्वानी की महिलाओं ने तैयार की हस्तनिर्मित रेशमी राखियां, रक्षाबंधन पर बढ़ी मांग

हल्द्वानी। रक्षाबंधन पर्व नजदीक आते ही हल्द्वानी की स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाएं पूरी मेहनत और लगन के साथ हस्तनिर्मित रेशमी राखियां तैयार करने में जुट गई हैं। महिलाओं की ओर से बनाई जा रही आकर्षक और पर्यावरण अनुकूल राखियां स्थानीय बाजार में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। इन राखियों के माध्यम से महिलाएं न केवल अपनी पारंपरिक कला को जीवित रख रही हैं, बल्कि ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी मजबूती दे रही हैं।

समूह की महिलाओं का कहना है कि इस बार रक्षाबंधन पर लोगों का रुझान स्थानीय स्तर पर तैयार की गई हस्तनिर्मित रेशमी राखियों की ओर बढ़ रहा है। बाजार में उपलब्ध मशीन से बनी राखियों की तुलना में हाथों से तैयार की गई इन राखियों की गुणवत्ता, आकर्षक डिजाइन और पारंपरिक रंग-रूप लोगों को अधिक पसंद आ रहे हैं।

महिलाएं विभिन्न रंगों के रेशमी धागों, मोतियों, कुंदन, सजावटी सामग्री और पारंपरिक डिजाइनों का उपयोग कर अलग-अलग प्रकार की राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों की कीमत भी आम लोगों की पहुंच के अनुसार रखी गई है, जिससे स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।

महिलाओं का मानना है कि यदि लोग इस रक्षाबंधन पर स्थानीय स्तर पर तैयार की गई राखियां खरीदेंगे तो इससे न केवल उन्हें आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरणा मिलेगी। समूह की सदस्य लगातार कई दिनों से राखियां बनाने में जुटी हैं ताकि त्योहार से पहले अधिक से अधिक ऑर्डर पूरे किए जा सकें।

‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना और छोटे उद्यमियों एवं स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। हल्द्वानी की महिलाओं की यह पहल इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए आत्मनिर्भर भारत के अभियान को भी मजबूती दे रही है।

रक्षाबंधन जैसे पर्व पर स्थानीय स्तर पर तैयार हस्तनिर्मित राखियों की बढ़ती मांग महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन रही है। इससे न केवल उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को भी नई पहचान मिलेगी। स्थानीय लोग भी ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना के साथ इन हस्तनिर्मित रेशमी राखियों को खरीदकर महिलाओं के इस प्रयास की सराहना कर रहे हैं।

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