October 7, 2026
रामपुर तिराहा में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को CM धामी ने दी श्रद्धांजलि, प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा
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रामपुर तिराहा में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को CM धामी ने दी श्रद्धांजलि, प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा

मुजफ्फरनगर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रतिभाग कर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर राज्य निर्माण के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले आंदोलनकारियों को नमन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन में शहीद हुए जिन आंदोलनकारियों की प्रतिमाएं अभी तक स्थापित नहीं हुई हैं, उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांव अथवा निवास क्षेत्र में उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाएंगी। उन्होंने रामपुर तिराहा स्थित राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण, स्मारक परिसर में स्थित पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने तथा संग्रहालय के विस्तार की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संग्रहालय में उत्तराखण्ड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों, पारंपरिक वेशभूषा और लोक संस्कृति से जुड़ी सामग्री को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के पुनः चिन्हीकरण की प्रक्रिया भी शीघ्र पूरी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले उत्तराखण्ड के वीर सैनिकों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसी भावना के अनुरूप राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों की स्मृतियों को भी भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा।

रामपुर तिराहा कांड के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों और बलिदानियों के सपनों के अनुरूप उत्तराखण्ड के निर्माण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार छठे वर्ष रामपुर तिराहा, खटीमा सहित अन्य शहीद स्थलों पर श्रद्धासुमन अर्पित करने का अवसर मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 और 2 अक्टूबर 1994 की रात रामपुर तिराहा में दिल्ली जा रहे राज्य आंदोलनकारियों के साथ हुई घटना उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। पृथक उत्तराखण्ड राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने लंबे समय तक संघर्ष किया। खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा और श्रीनगर के श्री यंत्र टापू सहित विभिन्न स्थानों पर आंदोलनकारियों ने बलिदान दिया। उनके संघर्ष और बलिदान के परिणामस्वरूप उत्तराखण्ड पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के सम्मान एवं हितों के लिए लगातार कार्य कर रही है। राज्य आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को राजकीय सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। क्षैतिज आरक्षण से लाभान्वित आश्रितों को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य आंदोलनकारियों के आश्रित प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए इन्हें तहसील स्तर पर जारी किए जाने के आदेश दिए गए हैं। आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का गठन किया गया है। राज्य पर्वों तथा जनपदीय एवं प्रदेश स्तरीय कार्यक्रमों में राज्य आंदोलनकारियों को आमंत्रित कर सम्मानित करने के साथ ही परिवहन निगम की बसों में उन्हें निःशुल्क आवागमन की सुविधा भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की सड़कों और विद्यालयों का नाम शहीद राज्य आंदोलनकारियों के नाम पर रखे जाने के संबंध में आदेश जारी किए जा चुके हैं। रामपुर तिराहा, खटीमा, देहरादून और मसूरी स्थित शहीद स्थलों के पुनर्निर्माण एवं विस्तारीकरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा कांड में शहीद राज्य आंदोलनकारियों की प्रतिमाओं की स्थापना के कार्य का शिलान्यास भी किया। उन्होंने बताया कि रामपुर तिराहा में शहीदों की मूर्ति स्थापना के लिए ₹27 लाख की धनराशि अवमुक्त की गई है। मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक के लिए भूमि दान करने वाले स्वर्गीय पंडित महावीर शर्मा के योगदान को भी नमन किया। उनकी प्रतिमा स्मारक परिसर में स्थापित की गई है।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल, विधान परिषद सदस्य वंदना वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष मुजफ्फरनगर डॉ. सुधीर सैनी, उत्तराखण्ड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट, उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, सचिव संस्कृति युगल किशोर पंत, हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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