देहरादून। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मामले में 23 अक्टूबर 2026 को एक नया घटनाक्रम सामने आया। पूर्व विधायक सुरेश राठौर और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने देहरादून स्थित सीबीआई अदालत में नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट को लेकर अपनी सहमति दी। दोनों के बयान अदालत में दर्ज किए गए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों ने परीक्षण के संबंध में कुछ शर्तें भी रखीं।
अदालत की कार्यवाही से जुड़े समाचारों के मुताबिक, दोनों को 26 अक्टूबर को दोबारा पेश होने के लिए कहा गया है। इस घटनाक्रम के बाद मामले से जुड़े आगे के कानूनी कदमों पर नजर बनी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
अंकिता भंडारी ऋषिकेश के निकट यमकेश्वर क्षेत्र में स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनके लापता होने की सूचना सामने आई थी। बाद में उनका शव चीला नहर बैराज के पास बरामद हुआ था।
इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता को आरोपी बनाया गया था। मई 2025 में अदालत ने तीनों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
मामले को लेकर समय-समय पर उठे सवालों और सार्वजनिक चर्चाओं के बीच अब नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया चर्चा में है।
नार्को टेस्ट को लेकर क्या हुआ?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सीबीआई अदालत ने सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर को टेस्ट के लिए स्वैच्छिक सहमति के संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था।
23 अक्टूबर को अदालत में पेश होने के बाद दोनों ने टेस्ट के लिए सहमति जताई। रिपोर्टों में बताया गया कि सुरेश राठौर ने परीक्षण से पहले मेडिकल जांच कराने की शर्त रखी, जबकि उर्मिला सनावर ने परीक्षण की प्रक्रिया को लेकर अपनी मांग रखी।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि टेस्ट के लिए सहमति देना और वास्तव में टेस्ट हो जाना अलग-अलग बातें हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि दोनों का नार्को टेस्ट पूरा हो चुका है।
अब 26 अक्टूबर की कार्यवाही पर नजर
दोनों की अगली पेशी 26 अक्टूबर के लिए बताई गई है। इस तारीख पर अदालत में क्या कार्यवाही होती है और जांच एजेंसी आगे क्या कदम उठाती है, यह आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इनका उपयोग जांच में किया जा सकता है, लेकिन इनके परिणामों को अपने आप अपराध साबित करने वाला निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। इनसे संबंधित किसी भी निष्कर्ष का मूल्यांकन कानून और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के संदर्भ में किया जाता है।
मामले में आगे क्या महत्वपूर्ण होगा?
अंकिता भंडारी हत्याकांड में आगे की जांच और अदालत की कार्यवाही से संबंधित आधिकारिक अपडेट महत्वपूर्ण रहेंगे। किसी भी व्यक्ति के बयान, आरोप या सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए, जब तक उसकी पुष्टि विश्वसनीय साक्ष्यों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया से न हो।
