पहाड़ की महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, प्याज की खेती से कमा रही अच्छा मुनाफा
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पहाड़ की महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, प्याज की खेती से कमा रही अच्छा मुनाफा

यमकेश्वर की महिलाओं ने प्याज की खेती से बदली तस्वीर, स्वरोजगार बन रहा आजीविका का मजबूत आधार

पौड़ी गढ़वाल। यमकेश्वर विकासखंड का गुजराड़ी गांव आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनकर उभर रहा है। यहां की महिलाएं पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अब प्याज की खेती के माध्यम से बेहतर आय अर्जित कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।

गांव की महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर संगठित तरीके से प्याज की खेती शुरू की। मेहनत और सामूहिक प्रयासों के दम पर अब यह खेती गांव की महिलाओं के लिए स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बन चुकी है। महिलाओं का कहना है कि यदि गांव में व्यापारी नहीं पहुंचते, तो वे स्वयं टैक्सी वाहनों के माध्यम से प्याज ऋषिकेश मंडी तक भेज रही हैं।

महिलाओं के अनुसार प्रत्येक परिवार से लगभग 4 से 5 क्विंटल प्याज का उत्पादन हो रहा है। पहले व्यापारी गांव पहुंचकर प्याज खरीद लेते थे, लेकिन बाजार में बाहरी प्याज की बढ़ती उपलब्धता और सड़क सुविधाओं की कमी के चलते अब महिलाओं ने खुद बाजार तक पहुंचने का रास्ता चुना है।

गुजराड़ी गांव की महिलाओं की इस पहल की आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा हो रही है। महिलाएं अब ऋषिकेश के व्यापारियों और ग्राहकों से सीधे संपर्क कर प्याज की बिक्री कर रही हैं। इससे उन्हें बेहतर मूल्य मिल रहा है और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि महिलाओं की यह पहल पहाड़ों में स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। वहीं कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा भी किसानों को योजनाओं का लाभ देने की बात कही गई है।

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