उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) स्थित विधानसभा भवन अब लोकतांत्रिक विमर्श के साथ-साथ राज्य की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत का भी केंद्र बनता जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूडी भूषण की पहल पर परिसर में नंदा राजजात यात्रा, छोलिया नृत्य, रम्माण उत्सव, पारंपरिक वाद्य यंत्र, ऐपन कला एवं रम्माण के पारंपरिक मुखौटों पर आधारित आकर्षक पेंटिंग्स और कलाकृतियाँ स्थापित की गई हैं। इन सभी कलाकृतियों को राज्य के स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार किया गया है, जिससे उन्हें प्रतिष्ठित मंच और सम्मान मिला है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तराखंड की लोककला और संस्कृति हमारी पहचान की आधारशिला है तथा कलाकारों को प्रोत्साहन देना संस्कृति संरक्षण की दिशा में सार्थक कदम है। उन्होंने बताया कि पूर्व में देहरादून स्थित विधानसभा भवन में भी स्थानीय महिलाओं द्वारा ऐपन कला का सृजन किया गया था, जिसे व्यापक सराहना मिली। कलाकारों मुकुल बड़ूनी, ज्योति जोशी सहित अन्य ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से उनका मनोबल बढ़ा है और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने बताया कि ऐपन कला से सुसज्जित शॉल, पेंटिंग और स्मृति-चिन्ह देश की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों को भेंट किए जा चुके हैं। इस अवसर पर वाहन प्रभारी शेखर पंत ने विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी दी। यह पहल न केवल लोकसंस्कृति के संरक्षण का प्रयास है, बल्कि स्थानीय कलाकारों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक स्वाभिमान को सशक्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

