देहरादून। उत्तराखंड में डिजिटल मीडिया पॉलिसी को शीघ्र लागू किए जाने की मांग को लेकर डिजिटल स्वतंत्र पत्रकार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के महानिदेशक को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने कहा कि प्रदेश के डिजिटल पत्रकार लंबे समय से डिजिटल मीडिया पॉलिसी के लागू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं और इस दिशा में शीघ्र निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान समय में फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) सहित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म जनसंचार के प्रभावशाली माध्यम बन चुके हैं। डिजिटल पत्रकार प्रदेश की जनता और शासन-प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा रहे हैं तथा सरकारी योजनाओं, जनहित के मुद्दों और सामाजिक सरोकारों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
संगठन ने बताया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा पिछले वर्ष डिजिटल मीडिया पॉलिसी का प्रारूप जारी कर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। डिजिटल स्वतंत्र पत्रकार एसोसिएशन ने भी उस समय अपने सुझाव विभाग को उपलब्ध कराए थे तथा डिजिटल पत्रकारों के अधिकारों, हितों और मान्यता को सुनिश्चित करने की मांग की थी। हालांकि इसके बाद अब तक नीति को लेकर कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है।
ज्ञापन में कहा गया कि डिजिटल मीडिया पॉलिसी लागू होने से सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी जनता तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगी। साथ ही डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता कर रहे हजारों पत्रकारों को वैधानिक पहचान और कार्य करने के लिए सुव्यवस्थित वातावरण प्राप्त होगा।
संगठन ने यह भी कहा कि डिजिटल मीडिया आज सूचना प्रसारण, जनजागरूकता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याएं भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शासन-प्रशासन तक पहुंच रही हैं। ऐसे में डिजिटल पत्रकारों के हितों की सुरक्षा और उनके कार्य की मान्यता के लिए स्पष्ट एवं प्रभावी डिजिटल मीडिया पॉलिसी की आवश्यकता है।
एसोसिएशन ने मांग की कि प्रदेशहित और पत्रकार हित को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड डिजिटल मीडिया पॉलिसी को जल्द से जल्द लागू करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश पोल खोल बहुगुणा, महामंत्री पहाड़ी शहजाद अली, कोषाध्यक्ष अजय नौटियाल, संयोजक दीपक कैंतुरा सहित विजय रावत, सपना बुटोला, सुरेंद्र रावत, अवनीश कुमार, अरविंद सिंह, भूपेंद्र राठौर और प्रदीप शाह उपस्थित रहे।
