ऋषिकेश। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की पीसीएस परीक्षा-2024 में ऋषिकेश की मीनाक्षी भाटिया ने सामान्य वर्ग में पांचवीं रैंक प्राप्त कर डिप्टी कलेक्टर पद हासिल किया है। उनकी सफलता केवल एक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और परिवार की अथक मेहनत का प्रेरणादायी उदाहरण है।
मीनाक्षी भाटिया ने बताया कि वर्ष 2003 में जब वह मात्र डेढ़ वर्ष की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। उस समय उनकी बड़ी बहन की उम्र केवल साढ़े छह वर्ष थी। पिता के असमय निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां नीलम भाटिया के कंधों पर आ गई।

आर्थिक परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन उनकी मां ने हार नहीं मानी। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने टिफिन सर्विस का कार्य शुरू किया। यही टिफिन सेवा परिवार के लिए जीवनयापन का मुख्य साधन बनी। समय के साथ दोनों बेटियों ने भी मां का सहयोग करना शुरू कर दिया। घरों और कार्यालयों में टिफिन पहुंचाने के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी।
मीनाक्षी ने बताया कि पढ़ाई में हमेशा अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्होंने और उनकी बड़ी बहन ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने में मदद मिली। कठिन परिस्थितियों के बावजूद दोनों बहनों ने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।
इस संघर्ष का परिणाम तब सामने आया जब वर्ष 2021 में उनकी बड़ी बहन ने उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा के पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर प्रशासनिक सेवा में स्थान बनाया। बहन की सफलता ने मीनाक्षी को भी नई प्रेरणा दी और उन्होंने अपने लक्ष्य की दिशा में और अधिक मेहनत शुरू कर दी।

उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडलिस्ट रहीं मीनाक्षी
मीनाक्षी भाटिया की शैक्षणिक उपलब्धियां भी बेहद शानदार रही हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी) से स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें माननीय राज्यपाल के हाथों गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
अब उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा-2024 में पांचवीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर बनने वाली मीनाक्षी भाटिया की सफलता प्रदेश के हजारों युवाओं, विशेष रूप से छात्राओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, दृढ़ संकल्प, मेहनत और शिक्षा के बल पर सफलता प्राप्त की जा सकती है।
