मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में आयोजित ‘गौरव सेनानी मिलन एवं पूर्व सैनिक सम्मान समारोह’ में कुमाऊं मंडल के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और सैनिक परिवारों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने सैनिकों के योगदान को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि सैनिक जीवनभर सैनिक ही रहता है, इसलिए पूर्व सैनिकों को ‘भूतपूर्व’ नहीं बल्कि ‘अभूतपूर्व’ कहा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि भी है, जिसने देश को अनेक वीर सपूत दिए हैं। उन्होंने स्वयं को सैनिक का पुत्र बताते हुए कहा कि वे सैनिक परिवारों के त्याग, अनुशासन और संघर्ष को भली-भांति समझते हैं।

सैनिक कल्याण के लिए सरकार के प्रमुख निर्णय
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में सैनिकों और उनके परिवारों के हित में राज्य सरकार द्वारा किए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख किया।
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शहीद सैनिकों के आश्रितों की अनुग्रह राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये।
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परमवीर चक्र विजेताओं की एकमुश्त अनुदान राशि 50 लाख से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये।
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बलिदानी सैनिक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी हेतु आवेदन अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष।
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सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को 25 लाख रुपये तक की अचल संपत्ति खरीद पर 25% स्टाम्प शुल्क छूट।
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देहरादून के गुनियाल गांव में निर्माणाधीन सैन्य धाम लगभग पूर्ण, जो वीर सैनिकों के शौर्य और बलिदान का प्रतीक बनेगा।
आत्मनिर्भर रक्षा और वन रैंक-वन पेंशन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सैन्य क्षमता और रक्षा आत्मनिर्भरता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने वन रैंक-वन पेंशन (OROP) को पूर्व सैनिकों के हित में ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार सैनिकों तथा उनके परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।
