देहरादून: मानसून के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों को दुरुस्त करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने प्रदेशव्यापी विशेष अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर कुमाऊं से गढ़वाल और पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी जिलों तक विभागीय टीमें युद्धस्तर पर सड़क मरम्मत कार्य में जुट गई हैं। सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसकी मुख्यमंत्री स्तर से लगातार निगरानी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़क मरम्मत केवल औपचारिकता न हो, बल्कि निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए सभी जिलों में क्षतिग्रस्त सड़कों, ग्रामीण मार्गों और संपर्क सड़कों का सर्वे कर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत और पुनर्निर्माण कराया जा रहा है।
पहाड़ से मैदान तक तेज हुआ मरम्मत अभियान
मानसून के कारण कई स्थानों पर सड़कें धंसने, गड्ढे बनने और सड़क किनारों के क्षतिग्रस्त होने से लोगों को आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बारिश का प्रभाव कम होते ही लोक निर्माण विभाग सहित संबंधित एजेंसियों ने फील्ड में उतरकर मरम्मत कार्य तेज कर दिया है।
पर्वतीय जिलों में मुख्य राजमार्गों के साथ-साथ ग्रामीण और संपर्क मार्गों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि ये सड़कें शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और पर्यटन जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंच की जीवनरेखा हैं। वहीं मैदानी क्षेत्रों में जलभराव और बारिश से खराब हुई सड़कों की भी तेजी से मरम्मत की जा रही है।

गुणवत्ता से समझौता नहीं, अधिकारियों की होगी जवाबदेही
विभागीय टीमें मौके पर पहुंचकर क्षति का आकलन कर रही हैं। जहां पैचवर्क पर्याप्त है वहां तत्काल गड्ढे भरे जा रहे हैं, जबकि गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हिस्सों में आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों को प्रतिदिन प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करने और कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि 15 अक्टूबर की समयसीमा केवल कागजी लक्ष्य नहीं है। तय अवधि पूरी होने के बाद वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर सड़क मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करेंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि घटिया निर्माण, मानकों की अनदेखी या अनावश्यक देरी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य मानसून के बाद प्रदेश के सड़क नेटवर्क को शीघ्र सामान्य बनाते हुए नागरिकों को सुरक्षित, सुगम और बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना है।
