November 4, 2026
विदेश में तलाक लेकर भारत में दूसरी शादी करने वालों को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, विदेशी डिक्री से नहीं बचेंगे द्विविवाह के मुकदमे
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विदेश में तलाक लेकर भारत में दूसरी शादी करने वालों को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका, विदेशी डिक्री से नहीं बचेंगे द्विविवाह के मुकदमे

नई दिल्ली। विदेश में तलाक लेकर दूसरी शादी करने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि भारतीय कानून के तहत हुई पहली शादी को विदेशी अदालत से ऐसे आधार पर मिले तलाक के जरिए समाप्त नहीं माना जा सकता, जिसे भारतीय वैवाहिक कानून मान्यता नहीं देता।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने एक व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी। व्यक्ति ने ब्रिटेन की अदालत से मिले तलाक के आधार पर दूसरी शादी की थी और भारत में उसके खिलाफ दर्ज द्विविवाह (बिगामी) तथा आपराधिक साजिश के मामले को रद्द करने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विदेशी तलाक की डिक्री भारतीय कानून के अनुरूप नहीं थी और उसे भारत में वैध तलाक मानकर आपराधिक मुकदमे से बचने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

क्या है पूरा मामला?

मामले के अनुसार, व्यक्ति ने 18 अप्रैल 2003 को आंध्र प्रदेश के सत्तेनपल्ली में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पहली शादी की थी। इसके बाद दोनों हैदराबाद में रहने लगे। वर्ष 2005 में पति डॉक्टर के रूप में करियर बनाने के लिए ब्रिटेन चला गया और बाद में उसकी पत्नी भी वहां पहुंच गई।

अगस्त 2007 में पत्नी बच्चे के जन्म के लिए भारत स्थित अपने मायके लौट आई। पति का दावा था कि उसने पत्नी को ब्रिटेन वापस बुलाने के लिए कई बार प्रयास किया, लेकिन वह वापस नहीं आई।

वैवाहिक संबंध बिगड़ने के बाद पति ने भारत में तलाक और बच्चे की अभिरक्षा से संबंधित मुकदमा दायर किया। हालांकि, संबंधित अदालत में उसकी याचिका खारिज हो गई। बाद में उसने हाईकोर्ट में अपील की, जिसे उसने वापस ले लिया।

ब्रिटेन की अदालत से मिला तलाक, फिर की दूसरी शादी

व्यक्ति को 2013 में ब्रिटेन की नागरिकता मिल गई। इसके बाद उसने इंग्लैंड की कैम्ब्रिज काउंटी कोर्ट में तलाक की कार्यवाही शुरू की।

वर्ष 2014 में ब्रिटेन की अदालत ने विवाह के अपरिवर्तनीय रूप से टूट जाने यानी Irretrievable Breakdown of Marriage के आधार पर तलाक दे दिया। इसके बाद व्यक्ति ने ब्रिटेन के नॉरफॉक में दूसरी शादी कर ली।

करीब दो वर्ष बाद पहली पत्नी ने आंध्र प्रदेश के सत्तेनपल्ली पुलिस स्टेशन में पति और अन्य लोगों के खिलाफ द्विविवाह तथा आपराधिक साजिश से संबंधित शिकायत दर्ज कराई।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विदेशी अदालत से मिला तलाक भारतीय कानून के तहत स्वतः मान्य नहीं हो जाता। विदेशी फैसले को भारत में मान्यता मिलने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 13 की कानूनी कसौटी पर खरा उतरना जरूरी है।

पीठ ने विशेष रूप से कहा कि जिस आधार पर ब्रिटेन की अदालत ने तलाक दिया, वह संबंधित भारतीय वैवाहिक कानून में वैधानिक रूप से मान्य नहीं था।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पहली शादी भारत में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। ऐसे में दूसरी शादी विदेश में होने या पति की नागरिकता बदल जाने से पहली शादी के कानूनी प्रभाव समाप्त नहीं हो जाते।

पीठ के अनुसार, द्विविवाह के आरोप की जांच में पहली शादी के अस्तित्व और उसके वैध रूप से समाप्त होने के प्रश्न को भी देखना आवश्यक है।

पति के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा, परिवार को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने पति की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपने खिलाफ द्विविवाह और आपराधिक साजिश के मामले को रद्द करने की मांग की थी।

हालांकि, अदालत ने पति के माता-पिता और दूसरी पत्नी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। इस तरह पति के खिलाफ मामला जारी रहेगा, जबकि अन्य आरोपियों को राहत मिली है।

विदेश में तलाक लेने वालों के लिए क्या है संदेश?

इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि भारत में हुई शादी के बाद विदेश में तलाक प्राप्त कर लेना हर परिस्थिति में भारतीय कानून के तहत विवाह समाप्त होने का प्रमाण नहीं है।

विदेशी तलाक की मान्यता इस बात पर निर्भर करती है कि संबंधित अदालत को अधिकार क्षेत्र था या नहीं, तलाक किस आधार पर दिया गया और क्या विदेशी डिक्री भारतीय कानून की आवश्यक शर्तों को पूरा करती है।

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