नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ की कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था (Carbon Border Adjustment Mechanism—CBAM) को लेकर चिंता जताई है। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित बर्लिन ग्लोबल डायलॉग 2026 के दौरान उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन से जुड़े आयात शुल्कों को बहुत सख्ती से लागू करने पर उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर उपभोक्ताओं और बाजार में कंपनियों की प्रतिस्पर्धा पर भी पड़ सकता है।
गोयल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत और आर्थिक सहयोग पर ध्यान दिया जा रहा है। मंत्री ने जर्मनी और नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा के दौरान यूरोपीय देशों के साथ व्यापार और औद्योगिक संबंधों पर भी चर्चा की।
क्या है यूरोपीय संघ का कार्बन टैक्स?
कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म यानी CBAM यूरोपीय संघ की ऐसी व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य कुछ आयातित वस्तुओं के उत्पादन से जुड़े कार्बन उत्सर्जन को ध्यान में रखना है। इसके तहत स्टील, एल्युमिनियम और अन्य ऊर्जा-गहन उत्पादों के आयात पर कार्बन उत्सर्जन से संबंधित लागत लागू हो सकती है।
इस व्यवस्था का असर उन देशों के निर्यातकों पर पड़ सकता है, जो यूरोपीय बाजार में अपने उत्पाद बेचते हैं। भारत के लिए यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्टील और अन्य औद्योगिक उत्पादों का निर्यात व्यापार, उत्पादन लागत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से सीधे जुड़ा है।
गोयल ने लागत और प्रतिस्पर्धा पर जताई चिंता
बर्लिन में चर्चा के दौरान गोयल ने तर्क दिया कि यदि कार्बन से जुड़े शुल्क और आयात लागत बहुत अधिक बढ़ जाते हैं, तो इससे यूरोप में उद्योगों की लागत बढ़ सकती है और उपभोक्ताओं को भी महंगे उत्पादों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने विकसित देशों की ऐतिहासिक कार्बन उत्सर्जन में भूमिका और जलवायु परिवर्तन से निपटने की जिम्मेदारी के बंटवारे पर भी सवाल उठाए।
मंत्री ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने की नीतियां ऐसी होनी चाहिए, जिनमें व्यापार, उद्योग और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखा जाए।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा?
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते से बाजार तक पहुंच, शुल्क में संभावित कमी और औद्योगिक सहयोग जैसे विषय जुड़े हैं। ऐसे में CBAM पर मतभेद दोनों पक्षों के व्यापारिक संवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं।
भारतीय निर्यातकों के लिए कार्बन उत्सर्जन का आकलन, स्वच्छ उत्पादन तकनीक और पर्यावरण संबंधी मानकों का पालन आगे और महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इस बयान से किसी व्यापार समझौते के अंतिम नतीजे या भारतीय निर्यात पर पड़ने वाले वास्तविक वित्तीय असर का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इसका प्रभाव लागू नियमों, संबंधित उत्पादों और कंपनियों की तैयारी पर निर्भर करेगा।
