गैरसैंण/चमोली। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष ने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सदन में नारेबाजी और हंगामे के बीच सरकार ने 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित कराया। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी दी गई। सत्र 28 अक्टूबर को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
सत्र के दौरान कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए काले झंडे लहराए और कार्यसूची की प्रतियां फाड़ीं। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सीमित अवधि के सत्र में जनहित से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा का अवसर नहीं मिला। वहीं, सरकार ने कहा कि आवश्यक वित्तीय और विधायी कार्यवाही पूरी की गई।
कुंभ, पेयजल और सड़क परियोजनाओं के लिए बजट में प्रावधान
अनुपूरक बजट में आधारभूत ढांचे और विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है। बजट से जुड़े विवरण के अनुसार, आगामी कुंभ आयोजन के लिए 290 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर परियोजना के लिए 30 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
गैरसैंण की पेयजल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रामगंगा नदी पर प्रस्तावित बांध परियोजना के लिए लगभग 122 करोड़ रुपये का प्रावधान भी शामिल है। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन के अंतर्गत ठेकेदारों के भुगतान के लिए 300 करोड़ रुपये और धान एवं गेहूं की खरीद के लिए 1,100 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
स्वास्थ्य, खेल और सामाजिक कल्याण पर भी ध्यान
बजट में पिथौरागढ़ में मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेज के लिए 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। खेल विश्वविद्यालय के लिए 35 करोड़ रुपये और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि के लिए 15 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं में भोजन माताओं के मानदेय के लिए 20 करोड़ रुपये, आंगनबाड़ी एवं पोषण कार्यक्रमों के लिए 20 करोड़ रुपये और निराश्रित विधवा पेंशन के लिए 27 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।
कई विधेयक भी पारित
विधानसभा में अनुपूरक बजट के साथ सिंचाई, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं, निजी विश्वविद्यालयों, जीएसटी और जन विश्वास से जुड़े विधेयकों सहित विभिन्न विधायी प्रस्तावों पर कार्यवाही हुई। सिंचाई से संबंधित विधेयक का उद्देश्य पुराने उत्तरी भारत नहर एवं जल निकासी अधिनियम, 1873 के स्थान पर नया कानूनी ढांचा लाना है।
संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि व्यवधानों के बावजूद सरकार ने जरूरी वित्तीय और विधायी कार्य पूरे किए। दूसरी ओर, विपक्ष ने सदन में चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए।
विधानसभा सत्र के दौरान बजट, विकास योजनाओं और विधायी कार्यवाही को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव देखने को मिला।
