देहरादून। उत्तराखंड में आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों को लेकर एक बार फिर मामला शासन के समक्ष पहुंच गया है। संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने कर्मचारियों के नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन तथा सेवा सुरक्षा सहित विभिन्न मांगों के समाधान के लिए शासन से ठोस कार्रवाई की मांग की है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव विनय शंकर पाण्डेय की ओर से 02 नवंबर 2026 को प्रदेश के मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र में संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ की मांगों का उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, संगठन ने विगत 6-7 अक्टूबर 2026 को परेड ग्राउंड में धरना दिया था। इसके बाद उच्च स्तर पर प्राप्त निर्देशों के क्रम में कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता भी हुई थी।
संगठन ने रखीं दो प्रमुख मांगें
पत्र में उल्लेख किया गया है कि वार्ता के दौरान कर्मचारी संगठन ने मुख्य रूप से दो मांगें रखी थीं।
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आउटसोर्स कर्मचारियों को उपनल कर्मचारियों की तर्ज पर समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए। साथ ही नियमितीकरण एवं समान सेवा नियमावली का लाभ प्रदान किया जाए।
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विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा बिना किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के समाप्त न की जाए तथा जिन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, उनकी बहाली की जाए।
प्रदेश में 11,267 आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत, 309 की सेवाएं समाप्त
पत्र में बताया गया है कि पूर्व में कर्मचारी संगठन को प्रदेशभर में आउटसोर्स कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति से संबंधित आंकड़े एकत्रित कर प्रस्तुत करने के लिए एक माह का समय दिया गया था। संगठन की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार:
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प्रदेश में वर्तमान में लगभग 11,267 आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं।
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लगभग 309 कर्मचारियों को सेवाओं से हटाया गया है।
शासन स्तर पर बैठक आयोजित करने का अनुरोध
मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव विनय शंकर पाण्डेय ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगों के नीतिगत समाधान के लिए संयुक्त मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ के साथ एक बैठक आयोजित किया जाना आवश्यक प्रतीत हो रहा है।
पत्र के माध्यम से मुख्य सचिव से अनुरोध किया गया है कि इस संबंध में उचित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जा सके।
अब देखना होगा कि शासन स्तर पर इस मामले में बैठक कब आयोजित होती है और प्रदेश के हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगों पर सरकार क्या निर्णय लेती है।
