देहरादून। उत्तराखंड जल संस्थान अधिकारी एवं कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर जल संस्थान के राजकीयकरण की मांग को लेकर शुक्रवार को जल संस्थान मुख्यालय, नेहरू कॉलोनी, देहरादून में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में डिप्लोमा इंजीनियर्स संगठन, तकनीकी संगठन और कर्मचारी संघ सहित तीनों घटक संगठनों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

धरने के दौरान संयुक्त मोर्चा के सलाहकार गजेंद्र कपिल ने कहा कि पूर्व व्यवस्था के अनुसार जल निगम पेयजल योजनाओं का निर्माण करता था और उन्हें जल संस्थान को हस्तांतरित कर देता था, जिसके बाद जल संस्थान उनके संचालन, रखरखाव और वितरण की जिम्मेदारी निभाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में शासन लगातार योजनाएं जल संस्थान से लेकर जल निगम को सौंप रहा है, जिससे जल संस्थान की आय प्रभावित हो रही है और कर्मचारियों के वेतन एवं पेंशन पर संकट गहरा गया है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि या तो पुरानी व्यवस्था को तत्काल बहाल किया जाए अथवा जल संस्थान को राजकीय विभाग घोषित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
संयुक्त मोर्चा के मुख्य संयोजक नंदलाल जोशी ने कहा कि प्रमुख पेयजल योजनाएं जल निगम को दिए जाने से जल संस्थान की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। इसके चलते कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के भुगतान में लगातार दिक्कतें आ रही हैं तथा सरकार की ओर से भी कोई आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1975 के अधिनियम के तहत जल संस्थान को पेयजल
