September 11, 2026
पौड़ी में सीता सर्किट विकास को मिली रफ्तार, पहले चरण के लिए 78 लाख रुपये स्वीकृत
Latest देहरादून न्यूज

पौड़ी में सीता सर्किट विकास को मिली रफ्तार, पहले चरण के लिए 78 लाख रुपये स्वीकृत

उत्तराखंड सरकार की मुख्यमंत्री घोषणा के तहत जनपद पौड़ी में सीता सर्किट के समग्र विकास की कार्यवाही तेज हो गई है। शुक्रवार को जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने संबंधित विभागों, कार्यदायी संस्था, जनप्रतिनिधियों और हितधारकों के साथ बैठक कर धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के सुनियोजित विकास की कार्ययोजना की समीक्षा की।

बैठक में सितोनस्यूं पट्टी स्थित विदाकुटी मंदिर, फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर, वाल्मीकि मंदिर तथा देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर के विकास पर विस्तार से चर्चा हुई। परियोजना के प्रथम चरण के लिए 78 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि सीता सर्किट के विकसित होने से क्षेत्र में धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

प्रथम चरण में मंदिर परिसरों में रामायण आधारित म्यूरल, वॉल म्यूरल, स्कल्पचर, दिशा-सूचक साइनेज, वाटर एटीएम और यात्री सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही मंदिरों की मरम्मत, रंग-रोगन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा। देवल स्थित लक्ष्मण मंदिर में पहले चरण में साइनेज तथा दूसरे चरण में पार्किंग निर्माण प्रस्तावित है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी स्थलों पर पौराणिक और ऐतिहासिक कथाओं को प्रमाणिक एवं आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण के अनुरूप विकास, अनावश्यक निर्माण से बचने, वास्तविक तस्वीरों के आधार पर डिजाइन तैयार करने, परिक्रमा पथ, स्वच्छ खुले परिसर और सोलर पैनलों की सुव्यवस्थित स्थापना पर विशेष जोर दिया।

साइट प्लान में वॉक-थ्रू डिजाइन न होने पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने एक से अधिक आर्किटेक्ट से 3-डी डिजाइन और वॉक-थ्रू तैयार कराने तथा सर्वोत्तम डिजाइन का चयन करने के निर्देश दिए।

बैठक में फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर के भूसमाधि स्थल के लिए भूमि दान पर सहमति बनी, जबकि धर्मशाला की भूमि संबंधी प्रक्रिया जारी है। वहीं कोटसाड़ा स्थित वाल्मीकि मंदिर की भूमि स्थिति स्पष्ट करने के लिए संयुक्त मजिस्ट्रेट को मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने तथा सभी संबंधित मंदिरों की भूमि का सर्वे कर सोमवार तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

द्वितीय चरण में फलस्वाड़ी सीता माता मंदिर तक संपर्क मार्ग, सड़क मुआवजा, देवल लक्ष्मण मंदिर में पार्किंग, धर्मशाला निर्माण तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को शामिल करते हुए शासन को विस्तृत प्रस्ताव भेजा जाएगा। बैठक में ग्राम प्रधानों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा पर्यटन एवं जीएमवीएन के अधिकारियों ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *