मानसा (पंजाब): पंजाब में नशे के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था और नशा विरोधी अभियान से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 13 अक्टूबर 2026 को मानसा में हुई इस घटना के बाद परिजनों और समर्थकों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। 14 अक्टूबर की सुबह तक परिवार और प्रशासन के बीच बातचीत से समाधान नहीं निकलने की खबर सामने आई।
मेडिकल स्टोर पर विवाद के बाद चली गोली
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, परविंदर सिंह झोटा लंबे समय से नशीले पदार्थों की कथित बिक्री के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। घटना के दिन वह अपने साथियों के साथ एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे थे, जहां कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर दुकान संचालक से विवाद हुआ। इसी दौरान गोली चलने से झोटा की मौत हो गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें विवाद के दौरान धमकी और गोली चलने की घटना दिखाई देने की बात कही गई है। मामले में आरोपी की भूमिका और घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
चार अन्य लोग भी घायल, दो की हालत गंभीर
इस गोलीबारी में परविंदर झोटा के अलावा चार अन्य लोगों के घायल होने की खबर है। रिपोर्टों के मुताबिक, घायलों में दो की हालत गंभीर बताई गई। घटना के बाद परिजनों और समर्थकों ने अस्पताल तथा मानसा के 12 हट्टा चौक के आसपास धरना देकर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग उठाई। परिवार का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर फिर बहस
परविंदर झोटा की हत्या ने पंजाब में नशे के खिलाफ सक्रिय लोगों की सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी है। इससे पहले मई 2026 में फगवाड़ा के पास आरटीआई कार्यकर्ता और अधिवक्ता सिमरनजीत सिंह की गोली मारकर हत्या की गई थी। शुरुआती पुलिस जांच में उनके चचेरे भाई के साथ वित्तीय विवाद की बात सामने आई थी और पुलिस ने अन्य पहलुओं की भी जांच की थी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर सिमरनजीत सिंह की हत्या को नशा विरोधी अभियान से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
पंजाब में नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकारी कार्रवाई के साथ-साथ नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। लेकिन नशे की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
परविंदर झोटा हत्याकांड में अब लोगों की निगाहें पुलिस जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और परिवार को न्याय दिलाने की कार्रवाई पर टिकी हैं। मामले में हत्या के पीछे की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
