नई दिल्ली/मुंबई। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने ग्राहकों की जानकारी के संभावित डेटा लीक के मामले की जांच शुरू की है। बैंक ने 21 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि डार्क वेब पर उपलब्ध लगभग 3.75 लाख रिकॉर्ड के शुरुआती विश्लेषण में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी शामिल थी।
इस मामले को लेकर बैंक ने साइबर सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल सक्रिय किए हैं और स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी की मदद से जांच शुरू कराई है। बैंक के अनुसार, फिलहाल इस घटना से उसके मुख्य कारोबारी संचालन, वित्तीय प्रदर्शन या सेवाओं की निरंतरता पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा है।
16 अक्टूबर को मिली थी सूचना
SBI के मुताबिक, बैंक को 16 अक्टूबर 2026 को अपने थ्रेट-इंटेलिजेंस सेवा प्रदाता, डिफेंस साइबर एजेंसी और भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (CERT-In) से संभावित डेटा एक्सपोजर की सूचना मिली थी।
इसके बाद बैंक ने घटना की प्रकृति, डेटा की प्रामाणिकता, संभावित स्रोत और प्रभावित जानकारी की सीमा का पता लगाने के लिए जांच प्रक्रिया शुरू की। जांच के लिए CERT-In से संबद्ध स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को भी लगाया गया है।
ग्राहकों की कौन-सी जानकारी सामने आने की आशंका?
प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार, संबंधित रिकॉर्ड में कुछ ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, ईमेल और आवासीय पते जैसी व्यक्तिगत जानकारी शामिल थी। इसके अलावा शाखा संबंधी विवरण, ग्राहक पहचान फाइल (CIF) पहचानकर्ता, लीड आईडी और ऋण या लीड रिकॉर्ड से जुड़ा मेटाडेटा भी शामिल होने की बात कही गई है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी शुरुआती जांच पर आधारित है। बैंक ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि डेटा किस स्रोत से बाहर आया, पूरी घटना का दायरा क्या है और बड़े रिकॉर्ड समूह में मौजूद बाकी जानकारी किस प्रकार की है।
क्या ग्राहकों के बैंक खाते का पैसा सुरक्षित है?
बैंक ने कहा है कि इस घटना का उसके मुख्य कारोबार पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा है। समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, SBI ने यह भी कहा कि ग्राहकों की खाते में जमा राशि सुरक्षित है।
यह समझना जरूरी है कि व्यक्तिगत जानकारी का संभावित खुलासा और बैंक खाते से पैसा चोरी होना अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल सार्वजनिक रिपोर्टों में इस घटना के कारण ग्राहकों के खाते से रकम निकलने की पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पूरे प्रभाव का पता चल सकेगा।
ग्राहकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
ऐसी घटनाओं में नाम, मोबाइल नंबर और अन्य व्यक्तिगत विवरण का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी करने वाले लोग बैंक अधिकारी बनकर संपर्क कर सकते हैं। इसलिए ग्राहकों को अतिरिक्त सतर्क रहना चाहिए।
- किसी अनजान कॉल, SMS या WhatsApp संदेश में आए लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचें।
- OTP, ATM PIN, UPI PIN, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या CVV किसी के साथ साझा न करें।
- बैंक कर्मचारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति को भी फोन पर गोपनीय बैंकिंग जानकारी न दें।
- किसी संदिग्ध लेनदेन या धोखाधड़ी की आशंका पर तुरंत बैंक के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें।
- साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर भारत की साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in का इस्तेमाल करें।
जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा पूरा मामला
SBI ने कहा है कि डेटा की प्रामाणिकता, संभावित स्रोत और जोखिमों का आकलन किया जा रहा है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जानकारी किस तरह सार्वजनिक हुई और क्या सभी संबंधित ग्राहकों की पहचान की जा चुकी है।
ग्राहकों को घबराने के बजाय सावधानी बरतनी चाहिए और बैंक की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखनी चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत शिकायत करना महत्वपूर्ण है।
