देहरादून, 02 जून 2026। मुस्लिम सेवा संगठन ने थानों स्थित जामा मस्जिद को सील किए जाने की कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए इसे अन्यायपूर्ण एवं अवैध बताया है। संगठन का कहना है कि थानों जामा मस्जिद वर्ष 1979 से अस्तित्व में है तथा वर्ष 1988 से सरकारी अभिलेखों में मस्जिद के रूप में दर्ज है।
संगठन द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि मस्जिद परिसर में एक कमरे के निर्माण के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा 8.03 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी तथा निर्माण कार्य का दायित्व पेयजल विभाग को सौंपा गया था। संगठन का दावा है कि आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था की थी।
मुस्लिम सेवा संगठन का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवं अधिकारियों की है, न कि मस्जिद प्रबंधन की। संगठन ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
संगठन का कहना है कि नियमानुसार किसी संस्था के विरुद्ध कार्रवाई से पूर्व नोटिस दिया जाना आवश्यक है, जबकि मस्जिद प्रबंधन को कोई नोटिस नहीं दिया गया। संगठन के अनुसार पहले निर्माणाधीन कमरे को और बाद में पूरी मस्जिद को सील कर दिया गया।
बयान में यह भी कहा गया है कि मस्जिद का अस्तित्व एमडीडीए के गठन से पहले का है तथा धार्मिक स्थलों के संदर्भ में अधिकार क्षेत्र को लेकर कानूनी प्रश्न मौजूद हैं। संगठन ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25 का हवाला देते हुए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की बात कही है।
मुस्लिम सेवा संगठन ने प्रशासन से सीलिंग की कार्रवाई वापस लेने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा कानून के अनुरूप न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि वह इस मामले में लोकतांत्रिक एवं कानूनी माध्यमों से अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
