हल्द्वानी। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) के वानिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग तथा भौमिकी एवं पर्यावरण विज्ञान विद्याशाखा के तत्वावधान में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधारोपण एवं व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी की अध्यक्षता में हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व वैज्ञानिक एवं पर्यावरण विशेषज्ञ प्रो. बी. एस. कालाकोटी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. एस. एस. भाकुनी उपस्थित रहे। इसके अलावा निदेशक सीका प्रो. गिरिजा पाण्डे, निदेशक अकादमिक प्रो. पी. डी. पंत एवं विभागाध्यक्ष डॉ. हरीश चन्द्र जोशी सहित विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विश्वविद्यालय परिसर में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण किया गया, जिसमें शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की। इसके बाद विज्ञान भवन में आयोजित व्याख्यान सत्र में लगभग 68 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम समन्वयक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. एच. सी. जोशी ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल, वायु और मृदा की गुणवत्ता तथा उपलब्धता मानव समाज और पारिस्थितिक तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पर्यावरणीय संसाधनों के संरक्षण पर विशेष बल दिया।
निदेशक सीका प्रो. गिरिजा पाण्डे ने कहा कि सामाजिक सोच और मानवीय व्यवहार पर्यावरण को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने वैश्विक स्तर पर बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों और रासायनिक प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए सतत विकास की दिशा में ठोस प्रयासों की आवश्यकता बताई।

विशिष्ट अतिथि डॉ. एस. एस. भाकुनी ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ रही भूगर्भीय गतिविधियों, भूकंप और भ्रंश प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये परिवर्तन नई पर्यावरणीय और आपदा संबंधी चुनौतियों को जन्म दे रहे हैं।
मुख्य वक्ता प्रो. बी. एस. कालाकोटी ने अपने व्याख्यान में कहा कि मानव गतिविधियों के कारण प्रकृति का पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हुआ है। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने, जैव विविधता में बदलाव और जल संसाधनों पर पड़ रहे प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल वृक्षारोपण ही नहीं, बल्कि वृक्षों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने स्थानीय समुदायों और पारंपरिक ज्ञान को पर्यावरण संरक्षण अभियानों से जोड़ने पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
