देहरादून। उत्तराखंड में मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रदेश के विभिन्न शहरों और कस्बों में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। दशहरा आयोजन स्थलों पर लोगों की भीड़ उमड़ी और श्रीराम के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। कहीं भव्य पुतला दहन आकर्षण का केंद्र रहा, तो कहीं वर्षों से चली आ रही स्थानीय परंपराओं ने उत्सव को खास बनाया।
देहरादून में परेड ग्राउंड बना मुख्य आकर्षण
राजधानी देहरादून में दशहरे को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। परेड ग्राउंड में मुख्य आयोजन को देखते हुए यातायात और पार्किंग की व्यवस्थाओं में बदलाव किए गए। इसके अलावा मसूरी और कांवली क्षेत्र में भी रावण के पुतलों का दहन किया गया। लोगों ने परिवार के साथ पहुंचकर दशहरे के कार्यक्रमों का आनंद लिया।
ऋषिकेश में रामानंद घाट पर हुआ रावण दहन
ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट के समीप रामानंद घाट पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतला दहन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को देखते हुए घाट रोड और संपर्क मार्गों पर सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की गई। दशहरा पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने उत्सव में भाग लिया।
पछुवादून में विकासनगर से सेलाकुई तक उत्सव
विकासनगर क्षेत्र के पछुवादून में भी विजयादशमी धूमधाम से मनाई गई। विकासनगर, डाकपत्थर, हरबर्टपुर और सेलाकुई सहित विभिन्न स्थानों पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। इस दौरान लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। आयोजनों के माध्यम से समाज में सद्भाव बनाए रखने, बुराइयों को त्यागने और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।
अल्मोड़ा में 23 पुतलों का दहन, अनूठी परंपरा ने खींचा ध्यान
अल्मोड़ा में दशहरे का आयोजन अपनी विशिष्ट परंपरा के कारण खास रहा। यहां जूलॉजी ग्राउंड में रावण के परिवार और रामायण के अन्य राक्षस पात्रों के कुल 23 पुतलों का दहन किया गया। इनमें रावण, कुंभकरण, मेघनाद और अहिरावण सहित कई पात्रों के पुतले शामिल थे। आतिशबाजी के बीच आयोजित कार्यक्रम में पहले ताड़का के पुतले का दहन हुआ और अंत में रावण के पुतले का दहन किया गया।
अल्मोड़ा में रावण के परिवार के अनेक पात्रों के पुतले जलाने की परंपरा दशहरे को अलग पहचान देती है। इस वर्ष भी आयोजन में पिछले वर्ष की तुलना में पांच अधिक पुतले शामिल किए गए।
बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश
प्रदेशभर में आयोजित दशहरा कार्यक्रमों ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकता की झलक दिखाई। रावण दहन के साथ लोगों ने अहंकार, अन्याय और बुराइयों को त्यागकर सत्य तथा सदाचार के रास्ते पर चलने का संकल्प लेने का संदेश दिया। विभिन्न स्थानों पर हुए आयोजनों के साथ विजयादशमी का पर्व उत्साह और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।
