प्रयागराज। उच्च शिक्षा, शोध तथा मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में परस्पर सहयोग को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू), हल्द्वानी एवं उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय (यूपीआरटीओयू), प्रयागराज के मध्य शैक्षणिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय के प्रयागराज स्थित मुख्यालय में सम्पन्न हुआ।

समझौता उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) नवीन चन्द्र लोहनी तथा उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर दोनों विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं शिक्षाविदों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रो. सत्यकाम ने प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट किया और दोनों संस्थानों के बीच सहयोग की इस नई पहल का स्वागत किया।
समझौते के उपरांत अपने संबोधन में प्रो. सत्यकाम ने कहा कि यह MoU दोनों विश्वविद्यालयों के मध्य शैक्षणिक उत्कृष्टता, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा संस्थागत सहयोग को नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, शोध एवं तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है और इस प्रकार के सहयोगात्मक प्रयास विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा शिक्षकों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराएंगे।
वहीं उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) नवीन चन्द्र लोहनी ने इस समझौते को दोनों संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से शैक्षणिक संसाधनों, विशेषज्ञता तथा अनुभवों का साझा उपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग विद्यार्थियों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध गतिविधियों के विस्तार और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगा।
समझौता ज्ञापन के अंतर्गत दोनों विश्वविद्यालय विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों में सहयोग करेंगे। इसके तहत संयुक्त शोध परियोजनाएं, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन, अध्ययन सामग्री का विकास, फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रम तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास से संबंधित विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाने के लिए भी संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के समझौते उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को व्यापक शैक्षणिक अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे दोनों विश्वविद्यालयों की अकादमिक क्षमता में वृद्धि होगी और शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त होगा।
कार्यक्रम के अंत में दोनों विश्वविद्यालयों के अधिकारियों ने इस समझौते को शिक्षा जगत के लिए एक सकारात्मक पहल बताते हुए भविष्य में भी विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह समझौता उच्च शिक्षा, शोध और मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में नई उपलब्धियों की आधारशिला साबित होने की उम्मीद है।
