देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े 17 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में परिवहन, शिक्षा, खनन, विधिक सेवा, आबकारी और कुंभ मेला व्यवस्थाओं से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए।
कैबिनेट ने उत्तराखंड मोटरयान (संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी देते हुए परिवहन विभाग में वर्दी निर्धारण का निर्णय लिया है। इसके तहत अब आरटीओ प्रवर्तन अधिकारी और प्रवर्तन चालक वर्दी में नजर आएंगे।
विधिक क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली 2026 को स्वीकृति दी गई है। इसके तहत जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का पदेन सदस्य बनाया जाएगा और एसिड अटैक पीड़ितों को भी निःशुल्क कानूनी सहायता मिलेगी।
खनन क्षेत्र में सरकार ने उप खनिज रॉयल्टी दर को 7 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 8 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। वहीं आबकारी नीति के तहत 6 प्रतिशत वैट दरों को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
परिवहन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 250 नई रोडवेज बसों की खरीद को हरी झंडी दी गई है। साथ ही जीएसटी दर में कमी (28% से 18%) के चलते पहले प्रस्तावित 100 बसों की संख्या बढ़ाकर 109 बसों की खरीद को भी मंजूरी मिली है।
शिक्षा क्षेत्र में कैबिनेट ने कई अहम फैसले लिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती के लिए नई नियमावली को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा संस्कृत शिक्षा विभाग की सेवा नियमावली 2026 को भी स्वीकृति दी गई, जिससे शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ होगा।
लोक निर्माण विभाग में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए 7 नए पद सृजित करने का निर्णय लिया गया है। वहीं ठेकेदारों के लिए निविदा सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ कर दी गई है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत 21 अशासकीय महाविद्यालयों को मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया है।
मदरसों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने कानून में संशोधन का निर्णय लिया है। अब कक्षा 1 से 8 तक संचालित मदरसों को जिला स्तर से ही संबद्धता मिलेगी, जबकि 9 से 12 तक के मदरसों को ही बोर्ड से संबद्ध होना अनिवार्य होगा।
कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। अब 1 करोड़ तक के कार्य मेलाधिकारी, 1 से 5 करोड़ तक के कार्य मंडलायुक्त और 5 करोड़ से अधिक के कार्य ही शासन स्तर से स्वीकृत होंगे।
वन विभाग में भी बदलाव करते हुए वन दरोगा पद के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं से बढ़ाकर स्नातक कर दी गई है, जबकि आयु सीमा 21 से 35 वर्ष कर दी गई है।
